Essay On Increasing Pollution In River In Hindi

जल प्रदूषण सभी के लिये एक गंभीर मुद्दा है जो कई तरीकों से मानव जाति को प्रभावित कर रहा है। हम सभी को अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिये इसके कारण, प्रभाव और रक्षात्मक उपाय के बारे में जानना चाहिये। समाज में जल प्रदूषण के बारे में जागरुकता को बढ़ाने के लिये बच्चों को उनके स्कूल और कॉलेजों में कुछ रचनात्मक क्रियाकलापों के माध्यम से समझाने का प्रयास करें। यहां पर जल प्रदूषण पर विभिन्न शब्द सीमाओं और सरल भाषा में कुछ निबंध उपलब्ध करा रहें हैं जो आपके बच्चों को उनके स्कूली परीक्षा और प्रतियोगिता में काफी उपयोगी साबित होगा।

जल प्रदूषण पर निबंध (वाटर पोल्लुशन एस्से)

You can get here some essays on Water Pollution in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, and 400 words.

जल प्रदूषण पर निबंध 1 (100)

धरती पर जल प्रदूषण लगातार एक बढ़ती समस्या बनती जा रही है जो सभी पहलुओं से मानव और जानवरों को प्रभावित कर रही है। मानव गतिविधियों के द्वारा उत्पन्न जहरीले प्रदूषकों के द्वारा पीने के पानी का मैलापन ही जल प्रदूषण है। कई स्रोतों के माध्यम से पूरा पानी प्रदूषित हो रहा है जैसे शहरी अपवाह, कृषि, औद्योगिक, तलछटी, अपशिष्ट भरावक्षेत्र से निक्षालन, पशु अपशिष्ट और दूसरी मानव गतिविधियाँ। सभी प्रदूषक पर्यावरण के लिये बहुत हानिकारक हैं।

मानव जनसंख्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही है इसलिये उनकी ज़रुरत और प्रतियोगिता प्रदूषण को बड़े स्तर पर ले जा रही है। यहाँ जीवन की संभावना को जारी रखने के साथ ही धरती के जल को बचाने के लिये हमारी आदतों में कुछ कठोर बदलाव को मानने की ज़रुरत है।

जल प्रदूषण पर निबंध 2 (150)

जीवन को खतरे में डाल रहा प्रदूषण का एक सबसे खतरनाक और खराब रुप जल प्रदूषण है। जो पानी हम रोज पीते हैं वो बिल्कुल साफ दिखायी देता है हालांकि इसमें तैरते हुए विभिन्न प्रकार के प्रदूषक रहते हैं। हमारी पृथ्वी जल से ढकी हुई है (लगभग पूरे भाग का 70%) इसलिये इसमें छोटा सा बदलाव भी पूरे विश्वभर के जीवन को प्रभावित कर सकता है। कृषि क्षेत्र से आने वाले प्रदूषकों के द्वारा सबसे बड़े स्तर का जल प्रदूषण होता है क्योंकि वहाँ फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिये खाद, कीटनाशक दवाईयाँ आदि का अत्यधिक प्रयोग किया जा रहा है।

हमें कृषि में इस्तेमाल होने वाले रसायनों में बड़े सुधार करने की ज़रुरत है। जल को प्रदूषित करने का तेल एक दूसरा बड़ा प्रदूषक है। ज़मीन और नदियों से तेल रिसना, पानी के जहाजों से तेल परिवहन, जहाजों का दुर्घटनाग्रस्त होने आदि से समुद्र में फैलने वाला तेल पूरे जल को प्रभावित करता है। महासागर या समुद्री जल में बारिश के पानी के माध्यम से हवा से दूसरे हाईड्रोकार्बन कण नीचे बैठ जाते हैं। अपशिष्ट भरावक्षेत्र, पुरानी खदानें, कूड़े का स्थान, सीवर, औद्योगिक कचरा और कृषिक्षेत्र में लीकेज़ से जल में इनका जहरीला कचरा मिल जाता है।

जल प्रदूषण पर निबंध 3 (200)

धरती पर ताजे पानी का स्तर हर दिन घटता ही जा रहा है। पृथ्वी पर पीने के पानी की उपलब्धता सीमित है जबकि वो भी इंसानों की गलत गतिविधियों की वजह से प्रदूषित हो रही है। ताजे पीने के पानी के अभाव में धरती पर जीवन की संभावना का आकलन करना बहुत कठिन है। जल की उपयोगिता और गुणवत्ता का गिरना जल में कार्बनिक, अकार्बनिक, जैविक और रेडियोलॉजिकल के माध्यम से बाहरी तत्वों का मिलना जल प्रदूषण है।

खतरनाक प्रदूषक नुकसानदायक रसायन, घुले हुए गैस, प्रसुप्त पदार्थ, घुले हुए मिनरल्स और कीटाणु सहित अशुद्धि के विभिन्न प्रकार लिये रहता है। सभी प्रदूषक पानी में घुले हुए ऑक्सीजन की मात्रा को घटा देता है और इंसान और जानवर को बड़े स्तर पर प्रभावित करता है। पौधों और जानवरों के जीवन को जारी रखने के लिये जलीय तंत्र के द्वारा जरुरी पानी में मौजूद ऑक्सीजन घुला हुआ ऑक्सीजन होता है। हालांकि कार्बनिक पदार्थों के कचरे का ऑक्सीकरण करने लिये वायुजीवी सूक्ष्मजीव के द्वारा ज़रुरी ऑक्सीजन जैव-रसायनिक ऑक्सीजन है। जल प्रदूषण दो कारणों से होता है, एक प्राकृतिक प्रदूषण (चट्टानों के निक्षालन से, कार्बनिक पदार्थों का अपक्षय, मरे जीवों का अपक्षय, अवसादन, मृदा अपरदन आदि) और दूसरा मानव जनित जल प्रदूषण (वन कटाई, जलीय स्रोतों के पास उद्योग लगाना, औद्योगिक कचरों का उच्च स्तर का उत्सर्जन, घरेलू सीवेज़, सिन्थेटिक रसायन, रेडियो-धर्मी कचरा, खाद, कीटनाशक दवाई आदि)।


 

जल प्रदूषण पर निबंध 4 (250)

धरती पर जीवन का सबसे मुख्य स्रोत ताजा पानी है। कोई भी जीव-जन्तु कुछ दिन तक बिना भोजन के गुजार सकता है लेकिन एक मिनट भी बिना पानी और ऑक्सीजन के जीवन की कल्पना करना मुश्किल है। पीने, धोने, औद्योगिक इस्तेमाल, कृषि, स्वीमिंग पूल और दूसरे जल क्रिड़ा केन्द्रों जैसे उद्देश्यों के लिये अधिक पानी की माँग लगातार बढ़ती जनसंख्या के कारण बढ़ रही है। बढ़ती मांग और विलासिता के जीवन की प्रतियोगिता के कारण जल प्रदूषण पूरे विश्व के लोगों के द्वारा किया जा रहा है। कई सारी मानव क्रियाकलापों से उत्पादित कचरा पूरे पानी को खराब करता है और जल में ऑक्सीजन की मात्रा को कम करता है। ऐसे प्रदूषक जल की भौतिक, रसायनिक, थर्मल और जैव-रसायनिक विशेषता को कम करते हैं और पानी के बाहर के साथ ही पानी के अंदर के जीवन को बुरी तरह प्रभावित करते हैं।

जब हम प्रदूषित पानी पीते हैं, खतरनाक रसायन और दूसरे प्रदूषक शरीर के अंदर प्रवेश कर जाते हैं और शरीर के सभी अंगों के कार्यों को बिगाड़ देते हैं और हमारा जीवन खतरे में डाल देते हैं। ऐसे खतरनाक रसायन पशु और पौधों के जीवन को भी बुरी तरह से प्रभावित करते हैं। जब पौधे अपनी जड़ों के द्वारा गंदे पानी को सोखते हैं, वो बढ़ना बंद कर देते हैं और मर या सूख जाते हैं। जहाजों और उद्योगों से छलकते तेल की वजह से हजारों समुद्री पक्षी मर जाते हैं। खाद, कीटनाशकों के कृषि उपयोगों से बाहर आने वाले रसायनों के कारण उच्च स्तरीय जल प्रदूषण होता है। जल प्रदूषक की मात्रा और प्रकार के आधार पर जल प्रदूषण का प्रभाव जगह के अनुसार बदलता है। पीने के पानी की गिरावट को रोकने के लिये तुरंत एक बचाव तरीके की ज़रुरत है जो धरती पर रह रहे हरेक अंतिम व्यक्ति की समझ और सहायता के द्वारा संभव है।

जल प्रदूषण पर निबंध 5 (300)

धरती पर जीवन के लिये जल सबसे ज़रुरी वस्तु है। यहाँ किसी भी प्रकार के जीवन और उसके अस्तित्व को ये संभव बनाता है। जीव मंडल में पारिस्थितिकी संतुलन को ये बनाये रखता है। पीने, नहाने, ऊर्जा उत्पादन, फसलों की सिंचाई, सीवेज़ के निपटान, उत्पादन प्रक्रिया आदि बहुत उद्देश्यों को पूरा करने के लिये स्वच्छ जल बहुत ज़रुरी है। बढ़ती जनसंख्या के कारण तेज औद्योगिकीकरण और अनियोजित शहरीकरण बढ़ रहा है जो बड़े और छोटे पानी के स्रोतों में ढेर सारा कचरा छोड़ रहें हैं जो अंतत: पानी की गुणवत्ता को गिरा रहा है। जल में ऐसे प्रदूषकों के सीधे और लगातार मिलने से पानी में उपलब्ध ओजोन (जो खतरनाक सूक्ष्म जीवों को मारता है) के घटने के द्वारा जल की स्व:शुद्धिकरण क्षमता घट रही है। जल प्रदूषक जल की रसायनिक, भौतिक और जैविक विशेषता को बिगाड़ रहा है जो पूरे विश्व में सभी पौड़-पौधों, मानव और जानवरों के लिये बहुत खतरनाक है। पशु और पौधों की बहुत सारी महत्वपूर्ण प्रजातियाँ जल प्रदूषकों के कारण खत्म हो चुकी है। ये एक वैश्विक समस्या है जो विकसित और विकासशील दोनों देशों को प्रभावित कर रही हैं। खनन, कृषि, मछली पालन, स्टॉकब्रिडींग, विभिन्न उद्योग, शहरी मानव क्रियाएँ, शहरीकरण, निर्माण उद्योगों की बढ़ती संख्या, घरेलू सीवेज़ आदि के कारण बड़े स्तर पर पूरा पानी प्रदूषित हो रहा है।

विभिन्न स्रोतों से निकले जल पदार्थ की विशिष्टता पर निर्भर जल प्रदूषण के बहुत सारे स्रोत हैं (बिन्दु स्रोत और गैर-बिन्दु स्रोत या बिखरा हुआ स्रोत)। उद्योग, सीवेज़ उपचार संयंत्र, अपशिष्ट भरावक्षेत्र, खतरनाक कूड़े की जगह से बिन्दु स्रोत पाइपलाईन, नाला, सीवर आदि सम्मिलित करता है, तेल भण्डारण टैंक से लीकेज़ जो सीधे पानी के स्रोतों में कचरा गिराता है। जल प्रदूषण का बिखरा हुआ स्रोत कृषि संबंधी मैदान, ढेर सारा पशुधन चारा, पार्किंग स्थल और सड़क में से सतह जल, शहरी सड़कों से तूफानी अपवाह आदि हैं जो बड़े पानी के स्रोतों में इनसे निकले हुए प्रदूषकों को मिला देता है। गैर-बिन्दु प्रदूषक स्रोत बड़े स्तर पर जल प्रदूषण में भागीदारी करता है जिसे नियंत्रित करना बहुत कठिन और महँगा है।


 

जल प्रदूषण पर निबंध 6 (400)

पूरे विश्व के लिये जल प्रदूषण एक बड़ा पर्यावरणीय और सामाजिक मुद्दा है। ये अपने चरम बिंदु पर पहुँच चुका है। राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी), नागपुर के अनुसार ये ध्यान दिलाया गया है कि नदी जल का 70% बड़े स्तर पर प्रदूषित हो गया है। भारत की मुख्य नदी व्यवस्था जैसे गंगा, ब्रह्मपुत्र, सिंधु, प्रायद्वीपीय और दक्षिण तट नदी व्यवस्था बड़े पैमाने पर प्रभावित हो चुकी है। भारत में मुख्य नदी खासतौर से गंगा भारतीय संस्कृति और विरासत से अत्यधिक जुड़ी हुई है। आमतौर पर लोग जल्दी सुबह नहाते हैं और किसी भी व्रत या उत्सव में गंगा जल को देवी-देवताओं को अर्पण करते हैं। अपने पूजा को संपन्न करने के मिथक में गंगा में पूजा विधि से जुड़ी सभी सामग्री को डाल देते हैं।

नदियों में डाले गये कचरे से जल के स्व:पुनर्चक्रण क्षमता के घटने के द्वारा जल प्रदूषण बढ़ता है इसलिये नदियों के पानी को स्वच्छ और ताजा रखने के लिये सभी देशों में खासतौर से भारत में सरकारों द्वारा इसे प्रतिबंधित कर देना चाहिये। उच्च स्तर के औद्योगिकीकरण होने के बावजूद दूसरे देशों से जल प्रदूषण की स्थिति भारत में अधिक खराब है। केन्द्रिय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में गंगा सबसे प्रदूषित नदी है अब जो पहले अपनी स्व शुद्धिकरण क्षमता और तेज बहने वाली नदी के रुप में प्रसिद्ध थी। लगभग 45 चमड़ा बनाने का कारखाना और 10 कपड़ा मिल कानपुर के निकट नदी में सीधे अपना कचरा (भारी कार्बनिक कचरा और सड़ा सामान) छोड़ते हैं। एक आकलन के अनुसार, गंगा नदी में रोज लगभग 1,400 मिलियन लीटर सीवेज़ और 200 मिलियन लीटर औद्योगिक कचरा लगातार छोड़ा जा रहा है।

दूसरे मुख्य उद्योग जिनसे जल प्रदूषण हो रहा है वो चीनी मिल, भट्टी, ग्लिस्रिन, टिन, पेंट, साबुन, कताई, रेयान, सिल्क, सूत आदि जो जहरीले कचरे निकालती है। 1984 में, गंगा के जल प्रदूषण को रोकने के लिये गंगा एक्शन प्लान को शुरु करने के लिये सरकार द्वारा एक केन्द्रिय गंगा प्राधिकारण की स्थापना की गयी थी। इस योजना के अनुसार हरिद्वार से हूगली तक बड़े पैमाने पर 27 शहरों में प्रदूषण फैला रही लगभग 120 फैक्टरियों को चिन्हित किया गया था। लखनऊ के पास गोमती नदी में लगभग 19.84 मिलियन गैलन कचरा लुगदी, कागज, भट्टी, चीनी, कताई, कपड़ा, सीमेंट, भारी रसायन, पेंट और वार्निश आदि के फैक्टरियों से गिरता है। पिछले 4 दशकों ये स्थिति और भी भयावह हो चुकी है। जल प्रदूषण से बचने के लिये सभी उद्योगों को मानक नियमों को मानना चाहिये, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सख्त कानून बनाने चाहिये, उचित सीवेज़ निपटान सुविधा का प्रबंधन हो, सीवेज़ और जल उपचार संयंत्र की स्थापना, सुलभ शौचालयों आदि का निर्माण करना चाहिये।


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प्रदूषण पर निबंध

Slogan on pollution

प्रदूषण को रोको – Slogan on pollution

Slogan on pollution in Hindi

  1. आओ मिलकर कसम ये खाये, प्रदुषण को हम दूर भगाये.
  2. शर्म करो-शर्म करो करोड़ो रुपये पटाखों पर बर्बाद मत करो-मत करो.
  3. प्रदुषण हटाओ, पर्यावरण बचाओं.
  4. हम सब की है ये जिम्मेदारी, प्रदुषण से मुक्त हो दुनिया हमारी.
  5. जेसे करेंगे वेसे भरेंगे, नहीं रोकेंगे प्रदुषण तो, बेकार मोंत मरोंगे.
  6. नहीं मिलेंगा जीवन दोबारा, प्रदुषण मुक्त हो पर्यावरण हमारा.
  7. प्रदुषण के लिए आपको कोई कुछ नहीं कहेंगा. सिवाय आपके आने वाली पीढ़ी के !
  8. हम सब का एक नारा, प्रदुषण मुक्त हो देश हमारा.

Pollution in Hindi

  1. Aao milkar kasam ye khaye, pradushan ko ham dur bhagaye.
  2. Sharm karo – Sharm karo, karodo rupaye patakho par barbad mat karo-mat karo.
  3. Pradushan hatao, paryavaran bachao.
  4. Hum sab ki hain ye jimmedari, pradushan se mukt ho duniya hamari.
  5. Jaise karenge vaise bharenge, nahi rokenge pradushan to, bekar maut maronge.
  6. Nahi milenga jivan dobara, pradushan mukt ho paryavaran hamara.
  7. Pradushan ke liye aapko koi kuch nahi kahenga, sivay aapke aanevali pidhi ke !
  8. Hum sab ka ek hi nara,pradushan mukt ho desh hamara.

Slogans on pollution

  1. Save the tree to fight pollution.
  2. Pollution is slow poison.
  3. Love humanity, hate pollution.
  4. Polluter are just like a killers.

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